Sunday, January 13, 2008

इतनी समझदारी तो वी.आई.पी. लोगों में होनी ही चाहिए....!


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी


मेरा नाम सत्‍यनारायण वर्मा है, मंडला के फ़ायर ब्रिगेड स्‍टेशन में ड्राइवर हूँ। काम बड़े जोखिम का है इसलिए हमारी स्‍पेशल ट्रेनिंग भी होती है। हमें पूरी तरह से मुस्‍तैद रहने की ट्रेनिंग दी जाती है। कई बार तो अभ्‍यास के लिए ड्रिल भी होती है। हमारी ड्यूटी चौबीसो घंटे की होती है, पर भगवान की दया से यहाँ आग लगने की घटनाएँ नहीं होती।

यहाँ फ़ायर ब्रिगेड की दो गाड़ि‍याँ हैं, जिनमें से एक तो हमेशा चालू हालत में रहती है। यह इमरजेंसी सेवा है न जाने कब ज़रूरत पड़ जाए, इसलिए हमारे स्‍टाफ को भी साथ रहना होता है। आग लगने का इंतज़ार करते हुए बैठा नहीं जा सकता, इसलिए ज़रूरी काम पड़ने पर हममें से एकाध उसे निपटाने चला जाता है। परंतु हम इस बात का पूरा ध्‍यान रखते हैं कि कम से कम एक आदमी टेलीफ़ोन उठाने के लिए तो मौजूद होना ही चाहिए।

गरमी के दिनों में हमारी ड्यूटी सख्‍त हो जाती है, दिन में कई-कई चक्‍कर लगाने पड़ते हैं। रात को थका मांदा लौटता हूँ तो मेरी घरवाली पूछती है, "कौन सी आग है जो रोज-रोज लग जाती है?"

मेरी पत्‍नी ही नहीं बल्कि कई लोगों को हमारी ऐसी ड्यूटी से शिकायत है।

पिछले दिनों फ्रिज के शो रूम वाले अग्रवाल साहब नाराज़ हो रहे थे। गाड़ी उनके दुकान के सामने खड़ी थी और रास्‍ता जाम हो गया था।

"फायर ब्रिगेड की गाड़ी है साहब। इमरजेंसी सेवा।" मैं सफाई देने लगा

"आपको यहाँ रोज-रोज सेवा देनी है तो पिछले रोड से आइए।" अग्रवाल जी झल्‍लाए।

"हम भी क्‍या करें साहब, विधायक जी का घर है, इसलिए आना पड़ता है।" मैंने सफाई दी।

"विधायक जी से कहो, उनकी मोटर हम ठीक करवा देंगे।"

"तो आप ही ठीक करवा दो, हमें भी रोज-रोज की झंझट से छुट्टी मिले...." मैं भी चिढ़ गया। आज यह हालत है हमारी, कि अग्रवाल हमारी गाड़ी के रास्‍ते पर रोक लगाएगा। हम फायर ब्रिगेड वाले हैं, ज़रूरत होगी तो तुम्‍हारे घर के अंदर घुस सकते हैं।

मुझे विधायक जी पर भी गुस्‍सा आता है। माना कि गरमी में पानी की तंगी होती है। कभी बिजली गोल तो कभी मोटर खराब हो जाती है। आपके घर की मोटर खराब है तो पानी का टैंकर मंगाइए। नगरनिगम वाले इसी काम के लिए हैं और वो बराबर वी.आई.पी. ड्यूटी में लगे रहते हैं। इतनी समझदारी तो वी.आई.पी. लोगों में होनी ही चाहिए....

5 comments:

संजय तिवारी said...

बिना किसी शब्द आडम्बर के तगड़ा व्यंग कर जाते हैं आप.

अनिल रघुराज said...

आनंद भाई, परकाया प्रवेश की अद्भुत कला है आप में।

eSwami said...

अद्भुत!

महेंद्र मिश्रा said...

करारा व्यंग बहुत बढ़िया

दीपक बाबा said...

अद्भुत