Monday, November 12, 2007

धन्‍यवाद धोनी, आपने अपने बाल कटा लिए _____!


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी



चित्र साभार:
  • शरत जायसवाल


  • मेरा नाम श्‍यामनारायण शिवहरे है। मध्‍यप्रदेश में उज्‍जैन का रहने वाला हूँ और यहाँ के डिग्री कॉलेज में रसायन विज्ञान का प्रोफ़ेसर हूँ। छोटा परिवार सुखी परिवार है और ईश्‍वर की कृपा से तनख्‍वाह भी अच्‍छी ख़ासी है, मज़े से गुज़ारा हो जाता है।

    मेरा एक बेटा है जो इस समय दसवीं बोर्ड की परीक्षा में बैठ रहा है। कद-काठी तंदुरूस्‍त है और मेरी शर्ट अभी से उस पर फिट आती है। भगवान ने उसे दिमाग़ भी अच्‍छा दिया है। मैं स्‍वयं पढ़ा लिखा हूँ और पढ़ाई का महत्‍व समझता हूँ। जानता हूँ कि इस उम्र में पढ़ाई कितनी ज़रूरी है। मैंने तय कर लिया है कि उसके कैरियर के बारे में अपनी कोई राय नहीं थोपूँगा। जो चुनना चाहे, चुने।

    परंतु इस उम्र में सही मार्गदर्शन की अत्‍यंत आवश्‍यकता होती है। एक पिता से अच्‍छा मार्गदर्शक कोई और नहीं हो सकता। उसकी ड्राइंग बचपन से ही अच्‍छी थी इसलिए मैंने तय किया है कि उसके लिए बायोलोजी विषय अच्‍छा रहेगा। बायोलोजी, जूलॉजी आदि विषयों में प्रेक्टिकल में अच्‍छी ड्राइंग वालों को अच्‍छे नंबर मिलते हैं।

    बच्‍चे का मन कच्‍चे घड़े की तरह होता है। इसलिए मैंने उसे सिखा दिया था, घर में कोई भी आता और पूछता "बेटे बड़े होकर क्‍या बनोगे? तो वह तपाक से कहता "डॉक्‍टर"। "शाबास ! वाह शिवहरे जी, बड़ा होनहार बेटा है आपका !" उसके खिलौनों में डॉक्‍टर की छोटी किट ख़रीद कर ले आया। खेलते समय डॉक्‍टर-डॉक्‍टर खेलता, ताकि उसके अवचेतन मन में डॉक्‍टर बनना अच्‍छे से जम जाए।

    अब वह बड़ा हो गया है। इस समय वह अपना समय पढ़ाई के अलावा अन्‍य गतिविधियों में अधिक बिताने लगा है। यह भी ठीक ही है, इससे बच्‍चे का समग्र विकास होता है। आजकल बिलकुल किताबी होना भी ठीक नहीं है। बच्‍चे में पढ़ाई के साथ-साथ पर्सनैलिटी भी होनी चाहिए।

    दो माह वह मेरे पास आया।

    "पापा। पचास रूपए चाहिए। बाल कटवाना है।"

    "यह लो। पर बाल कटवाने के पचास रूपए?" मैं समझ नहीं पाया। यहाँ तो बाल पंदरह से बीस रूपए मैं कट जाते हैं।

    "धोनी स्‍टाइल के पचास रूपए लगते हैं।"

    "क्‍या?" मैं कुछ समझ नहीं पाया। धोनी जैसी स्‍टाइल के पचास रूपए। इसके सिर पर धोनी का भूत कब चढ़ गया? अरे! धोनी कभी बाल कटाता भी है? और फिर इसे तो डॉक्‍टर बनना है। मैंने किसी डॉक्‍टर का बाल धोनी स्‍टाइल का नहीं देखा था।

    मेरा सपना बिखरता हुआ नज़र आया। मैंने उसे समझाने की कोशिश की "भले ही यह पचास रूपए ले जाओ, किसी दूसरे काम में खर्च कर लो, पर धोनी जैसे बाल मत रखो।"

    पर उसने मेरी बात नहीं मानी, तभी भगवान ने मेरा साथ दिया। मैं धोनी को धन्‍यवाद देता हूँ कि उसने अपने बाल छोटे करा लिए हैं।

    2 comments:

    Nityanand said...

    Bahoot achhe ... Isi baat par yaad aata hai ki, ek Naai ne ek bachhe ko ganja kar diya tha ... jabki bachha Salmaan khan ki "Tere Namm" film vali hair cut chah raha tha .... Baad me pata chala ki Naai ne "Tere Naam" film Interval ke baad se dekhi thi :) :) :)

    Sagar Chand Nahar said...

    आज तो आपके लेख जे ज्यादा नित्यानंदजी की टिप्पणी में ज्यादा मजा आया। :)